जमीन विवाद को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन, मैसूर सिल्क साड़ियों का उत्पादन ठप

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प्रकाशित समय : सुबह

बेंगलुरु, 27 फरवरी, 2026: कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के कर्मचारियों द्वारा अपनी कार्यस्थल की जमीन खोने के डर से शुरू किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद मशहूर ‘मैसूर सिल्क’ साड़ियों का उत्पादन पूरी तरह से रुक गया है।

टी. नरसीपुर (T. Narsipur) स्थित KSIC की मुख्य इकाई (मदर यूनिट) में परिचालन पूरी तरह ठप है। इस व्यवधान का असर मैसूर और चन्नापटना स्थित बुनाई इकाइयों (weaving units) पर भी पड़ा है, जहाँ उत्पादन बंद कर दिया गया है।

Representational image of workers protesting outside Karnataka Silk Industries Corporation (KSIC) and Mysore silk sarees.
मैसूर सिल्क पर संकट: जमीन विवाद के कारण ठप हुआ उत्पादन। क्या खत्म होगी कर्मचारियों की हड़ताल?

विरोध की मुख्य वजह: यह आंदोलन पिछले शनिवार को तब शुरू हुआ जब टी. नरसीपुर की ‘रॉ सिल्क यार्न रीलिंग यूनिट’ के 192 कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया। कर्मचारियों को डर है कि यूनिट की पाँच एकड़ जमीन को स्टेडियम बनाने के लिए ‘युवा अधिकारिता और खेल विभाग’ (DYES) को सौंप दिया जाएगा।

आंदोलन का विस्तार: बुधवार तक यह विरोध प्रदर्शन और व्यापक हो गया। मैसूर की बुनाई इकाई के लगभग 700 और चन्नापटना के 200 कर्मचारी भी अपने साथियों के समर्थन में उतर आए और साड़ियों का उत्पादन रोक दिया। वर्तमान में, ये सभी तीनों समूह टी. नरसीपुर में KSIC फिलेचर (रेशम निकालने की इकाई) के पास संयुक्त विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि इस जमीन को रेशम उत्पादन कार्यों के लिए ही सुरक्षित रखा जाए और रीलिंग यूनिट को किसी भी तरह के खतरे से बचाया जाए।

अधिकारियों की अपील: KSIC की प्रबंध निदेशक जेहरा नसीम और रेशम उत्पादन विभाग के सचिव आर. गिरीश ने विरोध स्थल का दौरा किया और कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि जब तक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते और समस्या का समाधान नहीं निकालते, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।

मैसूर सिल्क को अपनी गुणवत्ता और विरासत के लिए ‘जीआई टैग’ (GI Tag) प्राप्त है, और उत्पादन बंद होने से बाजार में इन साड़ियों की उपलब्धता पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

खुशालाल प्रजापति द्वार लिखा गया।

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